Success Stories

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05 Jul 2024

सब्जी उत्पादन से आजीविका में सुधार

भारत संरचनात्मक दृष्टि से गांवों का देश है।
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05 Jul 2024

मुर्गी पालन आजीविका सुधार हेतु बेहतर विकल्प

भारत में मुर्गी पालन का व्यवसाय प्राचीन समय से किया जा रहा है।
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05 Jul 2024

TRANSFORMING LIVES

THE PAPAYA REVOLUTION IN PANDARIPANI KAMAR
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10 May 2024

मशरूम प्रजाति (ओयेस्टर) उत्पादन

वर्तमान समय में बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण लगातार कृषि जोत भूमि घटती जा रही है
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06 May 2024

कृत्रिम आभूषण निर्माण - आजीविका का बेहतर विकल्प

गरीबी संसार के सबसे विकट समस्याओं में से एक है।
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21 Mar 2023

शिक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ा रहा “अक्षर परिचय अभियान”

गांव ताजपुर के बाहरी किनारे पर बसे मुसहर टोला के बच्चे,
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16 Feb 2023

किस्मत मौका देती है पर मेहनत चैंका देती है

सफलता मेहनत से मिलती है, इसके लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता।
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27 Jan 2023

वाटरशेड परियोजना के माध्यम से छोटे एवं लघु किसानों की आजीविका में वृद्धि |

अपने खेत में कार्य करते हुए सुजान लोधी एवं उसका परिवार बहुत ही खुश हैं
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02 Jan 2023

स्वच्छता के माध्यम से गाँवों में स्वास्थ्य सुधार

इफको-टोकियो जनरल इन्श्योरेंस कम्पनी लि. द्वारा अपने सी.एस.आर. के अंतर्गत, इफको-टोकियो समन्वित ग्रामीण विकास परियोजना..
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02 Jan 2023

कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से महिला सशक्तिकरण

भुवनेश्वर से पुरी रोड पर लगभग 31 कि.मी. की दूरी पर स्थित पिपली बाजार एवं सिउला की दुकानों में सुदर हस्तशिल्प जैसे नारियल जूट से बने जानवरों की आकृति के मनमोहक खिलौने
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02 Jan 2023

अखिल भारतीय सहकारिता सप्ताह में आई.एफ.एफ.डी.सी. की सहभागिता

सहकारिता के माध्यम से नए रोजगार सृजन कर समाज के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई जा सकती है।
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20 Oct 2022

मेढापल्ली में तीखी हरी मिर्च किसानों के जीवन में ला रही है मिठास (इफको ग्रामीण आजीविका विकास ओडिशा)

मिर्च के उत्पादन में भारत विश्व में पहले स्थान पर है। भारत अपने कुल मिर्च उत्पादन का 5% अन्य देशों को निर्यात करता है।
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23 Aug 2021

मसालायुक्त आजीविका

जब उचित मार्ग और प्रारंभिक हैंड होल्डिंग सहित सहायता प्रदान की जाये तो ग्रामीण महिलाओं में अपने जीवन और आजीविका में परिवर्तन लाने की पर्याप्त क्षमता होती है।यह कथन, इफको-टोकियो एकीकृत ग्रामीण विकास परियोजना-अजमेर (राजस्थान) में सच सिद्ध हो गया।
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23 Aug 2021

पलायन की सोच में परिवर्तन

उत्तराखंड के पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। परन्तु, इन पहाड़ों के लाखों निवासी, इतनी सुन्दर जगह से पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। इसका एक ही कारण है कि, यहाँ आजीविका के स्त्रोतों की कमी है।
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20 Aug 2021

VANISHED BUT REJUVENATED

THIS IS INDEED A STORY OF DILIGENT FARMER MR. SANNU SINGH RAWAT RESIDING IN VILLAGE BHAWANIPURA, BLOCK MASUDA BLOCK OF AJMER DISTRICT IN RAJASTHAN. HE IS NOW INTO VEGETABLE CULTIVATION AND HAS MADE FARMING A LUCRATIVE AFFAIR AND REAPING A PROFIT OF RS 2.50 LAKH PER ANNUM WITH THE HELP OF IFFCO-TOKIO ..
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20 Aug 2021

IFFDC- MOVING FORWARD WITH STEPS FOR ENHANCING LIVELIHOOD OF TRIBAL COMMUNITY

PRESENTLY, IFFDC IS NURTURING 1820 SHGS WITH A TOTAL MEMBERSHIP OF ...
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20 Aug 2021

SMALL STEP BUT HUGE IMPACT

THE BORO TRIBAL COMMUNITY PARTICULARLY THE WOMEN OF VILLAGES BAMANKUSHI, GHORAMARA, UTTAR BHERA, DAKSHIN BHERA AND BAGMARI SUPA IN BARPETA DISTRICT (ASSAM) ARE VERY MUCH CONTENT
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20 Aug 2021

NECESSITY IS THE MOTHER OF INVENTION

THIS IS THE STORY OF WOMEN SELF HELP GROUP (SHG) NAMED “DURGA SYAM SHAYATA SAMUH” OF VILLAGE BHAWANIPURA, BLOCK MASUDA, DISTRICT AJMER (RAJ.).
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14 Mar 2020

स्टाप डेम बना किसानों के लिए वरदान

यदि जल न होतातो सृष्टि का निर्माण सम्भव न होता। यही कारण है कि यह एक ऐसा प्राकृतिक संसाधन है जिसका कोई मोल नहीं है। जीवन के लिये जल की महत्ता को इसी से समझा जा सकता है कि बड़ी-बड़ी सभ्यताएँ नदियों के तट पर ही विकसित हुईं और अधिकांश प्राचीन नगर नदियों के तट पर ही बसे। जल की उपादेयता
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14 Mar 2020

हमारा अपना सामुदायिक भवन

वर्ष 2015 की बात है गंाव छायन] प्रतापगढ़ (राजस्थान) में आई.एफ.डी.सी. संस्था के कुछ अधिकारीगण आये] गंाव के लोगों से चर्चा की और कहा कि आपके गांव में कोई संस्था या समूह है या कोई परियोजना चल रही है तो गांव वालों का जबाव था] नहीं। वास्तव में उस समय गंाव में कोई भी संस्था या समूह नहीं चल रहा था।
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14 Mar 2020

विश्वास और हौसला से आई खुशहाली

मै शिवकला पत्नी श्री शिवराम निवासी गोडियागढ़ी खजुरो जनपद रायबरेली की रहने वाली अनुसूचित जाति की गरीब महिला हूँ। मेरे पास एक बीघा खेती भी नहीं थी, इसलिए हमारा परिवार मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। सन् 1996-97 में हमारे गाॅव में आई.एफ.एफ.डी.सी. संस्था द्वारा समिति का गठन किया गया।
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14 Mar 2020

एक पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की

वर्ष 2017-18 में आई.एफ.एफ.डी.सी. संस्था द्वारा इफको टोकियो समन्वित ग्रामीण विकास परियोजना के अन्तर्गत स्वयं सहायता समूह की बहनों को ग्राम स्तर पर सैनेट्री नेपकिन पैड बनाने की मशीन दी गई जिसमें 5 सदस्यों को
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14 Mar 2020

कम्पोस्ट खाद से पर्यावरण सुरक्षा

मुझे खुशी है कि, मेरा गाँव अब पहले की अपेक्षा बहुत साफ-सुथरा है। अब गाँव में जगह-जगह पर कूड़ा-कचरा के ढेर व बिखरा हुआ गोबर नहीं दिखाई देता। हमारे “उजाला स्वयं सहायता समूह” ने गाँव में फैली गन्दगी से कम्पोस्ट खाद बनाने की एक अनूठी पहल की जिसके हमें सकारात्मक परिणाम मिले। मेरा नाम श्यामलली है, मेरे पति का नाम
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12 Mar 2020

जमना समूह की पहचान बनी आटा चक्की

यह समूह मोटा मयंगा के स्कूल फला के पास है इसका नाम जमना समूह है इसमें 10 महिलाएं हैं। यह समूह इफको-टोकियो समन्वित ग्रामीण विकास परियोजना आने के बाद वर्ष 2015 के नवम्बर माह में बना था। इस समूह की अभी तक 28 बैठक हो चुकी हैं। जब समूह शुरू हुआ था तो इसकी मासिक बचत 50/- रुपये प्रति माह थी
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03 Feb 2020

मधुमक्खी पालन बना आय का अतिरिक्त साधन

रायबरेली जनपद की मलिकमऊ एवं खजुरो कृषि वानिकी समिति द्वारा अपने कार्यक्षेत्र की 25 महिला स्वयं सहायता सदस्यों के आय अर्जन हेतु मधुमक्खी पालन कार्यक्रम का प्रारम्भ सितम्बर 2018 में कराया गया
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